पृथ्वी के लिए दादी ने रखा उपवास, की प्रार्थना, जानिए प्रार्थना से क्या होता है - धर्म संसद
what is the benefit of prayer
Image Courtesy: sportskeeda.com

पृथ्वी के लिए दादी ने रखा उपवास, की प्रार्थना, जानिए प्रार्थना से क्या होता है

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वेस्टइंडीज जैसी दमदार टीम के खिलाफ अपने पहले ही टेस्ट मैच में पृथ्वी शॉ ने शतक लगाया। पृथ्वी बिहार के गया के मानपुर के रहने वाले हैं। उनके दादा अशोक शॉ, दादी रामदुलारी देवी व परिवार के अन्य सदस्य अब भी गया के मानपुर के शिवचरण सहाय लेन में रहते हैं। जब पृथ्वी मैदान में रन बटोर रहे थे, तब गया में उनकी दादी रामदुलारी देवी भगवान से प्रार्थना में जुटी हुई थीं।

पृथ्वी की दादी रामदुलारी देवी ने पृथ्वी के लिए पूरा दिन उपवास रखा था। पृथ्वी ने जैसे ही अपना शतक पूरा किया, गया के मानपुर के पटवा टोली में उनके घर के बाहर लोग जश्न मनाने लगे, पर पृथ्वी की दादी रामदुलारी देवी उठीं और सीधे पूजा घर में जाकर पूजा करने लगीं।

पृथ्वी के पिता पकंज शॉ 12 साल की उम्र में रोजगार की तलाश में मुंबई चले गए थे और भारी संघर्ष के बीच वहां अपने परिवार के लिए जगह बनाई। जब पृथ्वी के पिता पकंज मुंबई में संघर्ष कर रहे थे, तब भी उनकी मां रामदुलारी देवी गया में अपने बेटे पकंज के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती थीं और अब रामदुलारी देवी अपने पोते पृथ्वी के लिए प्रार्थना कर रही हैं, पर क्या प्रार्थना करने से कुछ होता है। क्या किसी के प्रार्थना करने से किसी की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। आज dharamsansad.com इन सवालों के जवाब लेकर आया है। जानिए इस बारे में क्या कहता है सनातन हिन्दू धर्म।

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पृथ्वी की दादी का उपवास, प्रार्थना जरूर उसके काम आई होगी

सनातन हिन्दू धर्म कहता है कि पृथ्वी की दादी रामदुलारी देवी का उपवास, उनका व्रत, उनकी प्रार्थना जरूर पृथ्वी के काम आई होगी। इस ब्राह्मंड में अगर कोई किसी के लिए प्रार्थना करता है, चाहे वह अपना हो या पराया, तो वह बेकार नहीं जाती।

प्रार्थना और आह दोनों का होता है बड़ा असर

इसी तरह अगर कोई टूटे हृदय से आह देता है, तो वह भी बेकार नही जाती। उसका भी उस व्यक्ति पर असर होना तय है, जिसके लिए यह आह उठी है। इसे कोई नहीं रोक सकता। अगर आपके लिए कई सारे लोग प्रार्थना कर रहे हैं। कई सारे लोग आपके खुश रहने की कामना कर रहे हैं, तो इसका फायदा आपको होगा ही होगा। कई सारे लोगों के हृदय से अगर किसी के लिए आह निकल रही है, तो उसका भी असर होगा ही होगा।

बेकार होती है ऐसी प्रार्थना, इससे मिलती है शक्ति

…तो फिर आप किसी को 500 रुपये दे दीजिए और उससे कहिए कि यार सुनो। तुम मेरे लिए पूरे दिन बैठकर प्रार्थना करो कि मेरा काम सफल हो जाए। वह आदमी पूरे दिन मंदिर में बैठकर आपके लिए प्रार्थना करता रहेगा। आपका कोई भला नहीं होगा। अब इसको ऐसे देखिए। आप कहीं जा रहे हैं। रास्ते में कोई व्यक्ति घायल सड़क पर पड़ा है। वह तड़प रहा है। आप उसे उठाते हैं। अस्पताल ले जाते हैं। उसकी जान बचाते हैं। उसने बस एक मिनट आपके लिए प्रार्थना की। हे प्रभु। यह कितना अच्छा आदमी है। इसे खुश रखना परमात्मा। बस आपका काम हो गया। परमात्मा तक उसकी आवाज पहुंचनी ही पहुंचनी है।

कोई भूख से बिलबिला रहा है। आपने उसको खाना खिलाया। पानी पिलाया। उसकी मदद की। वह हाथ उठाकर बस एक क्षण के लिए कह देता है कि ईश्वर तुम्हें खुश रखें। बस आपका काम हो गया। दरअसल गरीब-लाचार, मुसीबत में पड़े लोगों की जैसे ही हम मदद करते हैं, वे हमारे लिए भगवान के न्यायालय में वकील बन जाते हैं। परमेश्वर के सामने हमारी तरफदारी करते हैं। हमारे लिए भगवान से लड़ते हैं। भगवान से कहते हैं कि हे ईश्वर, धरती पर तुम्हारे बेहतरीन मनुष्यों में से एक है यह आदमी। इसकी मदद करो।

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इस बात का रखें ध्यान

हिन्दू सनातम धर्म कहता है कि जीवन में वही मनुष्य सफल होगा। वही मनुष्य सुखी और प्रसन्न रहेगा। वही मनुष्य आगे बढ़ेगा। वही मनुष्य स्वस्थ रहेगा, जिसके लिए दिल से प्रार्थना करने वालों की संख्या ज्यादा होगी। जो किसी की आह न लेता होगा, वही उन्नति करेगा। उसी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। वही प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। चाहे दादी प्रार्थना करे या मां प्रार्थना करे, वह प्रार्थना तभी सफल होगी, जब जिसके लिए वह की जा रही है, उसने प्रार्थना करने वाले के साथ अच्छा व्यवहार किया है। सम्मान का व्यवहार किया है। आदर का व्यवहार किया है। सेवा की है। वरना पुत्र और पोता कैसा भी हो, हर मां और दादी उसकी सफलता प्रार्थना करती है, पर वैसी प्रार्थना असरहीन होती है। उसका कुछ लाभ नहीं होता।

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