अगले जन्म में सांप और गिद्ध बनता है रेपिस्ट, ज्यादा खाने वाला बनता है सूअर - धर्म संसद
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Image Courtesy: nirbhayam.com

अगले जन्म में सांप और गिद्ध बनता है रेपिस्ट, ज्यादा खाने वाला बनता है सूअर

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भारतीय धर्मग्रंथों में इसे अच्छे से समझाया है कि अगले जन्म में किसका किस रूप में जन्म होगा। जैसे कोई हर वक्त डरा रहता है। वह हर फैसले डर के आधार पर ही लेता है। वह किसी को डर की वजह से नुकसान पहुंचा देता है। उसे जैसे ही लगता है कि कोई उसे नुकसान पहुंचा सकता है, तो सिर्फ इस डर की वजह से वह किसी को भी हानि पहुंचा देता है। ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में सांप बनेगा, क्योंकि प्रकृति (ईश्वर) यह मानती है कि उसके विचार सांप के विचार से मिलते-जुलते हैं। सांप भी हर वक्त डरा रहता है। वह किसी को इसलिए नहीं काटता, क्योंकि उससे उसकी कोई दुश्मनी होती है, वह सिर्फ डर की वजह से किसी को भी काट लेता है।

जो व्यक्ति रेप करता है। जो रेपिस्ट है। जबरन महिलाओं से संबंध बनाता है। वह अगले जन्म में भेड़िया, सियार, गिद्ध, सांप और बगुला बनेगा। प्रकृति(ईश्वर) को उसके गुण इन जानवरों के गुण से मिलते-जुलते लगते हैं। वह मनुष्य रूप में जन्म लेने के बावजूद इन्हीं जानवरों की तरह हरकत करता है, इसलिए प्रकृति उसे इन्हीं जानवरों की दुनिया में भेज देती है।

पेटू व्यक्ति का जन्म सूअर के रूप में होता है

उसी तरह अगर किसी को हर वक्त खाने की पड़ी रहती है। वह हर वक्त खाता रहता है। खाना उसके जीवन में सबसे ज्यादा अहमियत रखता है। यह उसका सबसे प्रिय काम होता है। ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में सूअर बन सकता है।

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बुजुर्गों का अपमान करने वाला कौआ बनता है

भारतीय धर्मग्रंथों के मुताबिक हमारे कर्म सिर्फ इस जन्म में हमारे सुख-दुख का कारण नहीं बनते, बल्कि हमारे अगले जन्म को भी तय करते हैं। जो व्यक्ति अपने से बड़ों का अनादर करता है। घर या बाहर के बुजुर्गों पर हाथ उठाता है, वह अगले जन्म में कौआ के रूप में जन्म लेगा। जो व्यक्ति चोरी करता है। जो दूसरों के धन को गलत तरीके से हथिया लेता है, उसका जन्म कबूतर के रूप में होगा। जो दूसरों को लूटता है। उसका जन्म तोते के रूप में होगा और उसे तोते के रूप में अपना पूरा जीवन पिंजरे में बिताना होगा।

हत्या करने वाला गदहा बनता है

जो व्यक्ति हत्याएं करता है। जो दूसरों की जान लेता है, वह अगले जन्म में गदहा बनेगा। उसे रोज ढेर सारा काम भी करना होगा और अपने मालिक की मार भी खानी होगी। जो व्यक्ति बहुत ज्यादा कामुक है। हालंकि वह रेप तो नहीं करता, पर हर वक्त उसके दिमाग में सेक्स ही चलता रहता है, तो वह व्यक्ति अगले जन्म में बंदर या कुत्ता बनेगा।

हर वक्त सोने की इच्छा रखने वाला भालू के रूप में जन्म लेता है

जिस व्यक्ति को सोना बहुत अच्छा लगता है। उसके जीवन में नींद से बड़ा कुछ नहीं है। जो अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा सोकर गुजार देता है, वह अगले जन्म में भालू (पोलर बीयर) बन जाता है। प्रकृति (ईश्वर) उसे मौका दे देती है कि जाओ, जितना मन है सो लो। पोलर बीयर जमीन में बने गड्ढ़ों, खोखले पेडों और गुफाओं में पूरी सर्दी सोया रहता है। वह 100 दिनों तक बिना खाना और पानी के बस सोता रहता है। जो लोग नफरत करते हैं। हर वक्त दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में लगे रहते हैं। भले ही दूसरे को नुकसान पहुंचा कर उन्हें कोई फायदा न हो, पर उन्हें दूसरों को नुकसान पहुंचाने में मजा आता है, दूसरों को परेशान करने में आनंद आता है, ऐसे लोग अगले जन्म में सांप बनते हैं।

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महर्षि वेदव्यास, श्रीमद्भागवतगीता और गरुड़ पुराण ने इसे समझाया है

महर्षि वेदव्यास, श्रीमद्भागवतगीता और गरुड़ पुराण में इसे समझाया गया है कि हमारे इस जन्म के कर्म न सिर्फ हमारे इस जन्म के सुखों और दुखों का कारण बनते हैं, बल्कि हमारे अगले जन्मों का निर्धारण भी इसी से होता है। श्रीमद्भागवतगीता तो यहां तक कहता है कि जो जैसा सोचेगा, वह वैसा ही बन जाएगा। जिसकी चेतना जैसी रहेगी, वह वैसा ही हो जाएगा। प्रकृति (ईश्वर) उसे उसकी सोच के अनुसार स्वरूप दे देगी, तो इसे समझिए कोई अगले जन्म में क्या बनेगा।

यह फैसला प्रकृति या भगवान नहीं करते, बल्कि मनुष्य खुद करता है। दूसरे जीव-जंतुओं के हाथ में ज्यादा कुछ नहीं हैं। उन्हें 84 हजार योनियों में से गुजरना पड़ता है और 84 हजार योनियों के बाद मनुष्य का शरीर मिलता है, पर जो मनुष्य है, वह न सिर्फ अपना वर्तमान जन्म बेहतर बना सकता है, बल्कि अगले जन्म का भी फैसला उसके ही हाथ में है। यह केवल और केवल उसके ही हाथ में है और किसी के हाथ में नहीं है।

जानिए, मनुष्य के रूप में दोबारा जन्म लेने के लिए क्या करना पड़ता है

प्रकृति (ईश्वर) को किसी से न कोई दुश्मनी है और न कोई दोस्ती। वह नियमों से संचालित है। प्रकृति का नियम है कि जो जैसा चाहता है, वह वैसा बन जाता है। इस जन्म में भी और अगले जन्म में भी। जो लालची है। थोड़े से लाभ के लिए कितना भी गिर सकता है, उसका अगला जन्म कुत्ते के रूप में होता है। इसमें अच्छा या बुरा कुछ नहीं है। प्रकृति को लगा कि उसके गुण, उसके कर्म उसी जानवर के गुण से मिलते-जुलते हैं, तो उसे उसी श्रेणी में भेज दिया गया। जो मनुष्य ईमानदारी, सत्य, अहिंसा का पालन करता है। नशे से मुक्त रहता है। व्याभिचार से मुक्त रहता है, वह अगले जन्म में या तो मनुष्य बनेगा या फिर अगर उसके कर्म बहुत ही उच्च कोटि के हुए, तो वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्त होकर ईश्वर का हिस्सा बन जाएगा। यही जीवन चक्र है।

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