गुजराती व्यापारी, बिहारी सिपाही, सीमा पर हम न छाती ताने, तो फिर आएगा गजनी तबाही मचाने - धर्म संसद
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Image Courtesy: trtworld.com

गुजराती व्यापारी, बिहारी सिपाही, सीमा पर हम न छाती ताने, तो फिर आएगा गजनी तबाही मचाने

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गुजराती भाइयों,

जय श्री राम

मैं कश्मीर में तैनात एक फौजी हूं। बिहार का हूं। बिहार का शायद ही कोई गांव ऐसा हो, जहां का कोई युवक सेना में न हो। बिहारियों को गुजरात में मारा जा रहा है। उन्हें बोझ और बेकार कहा जा रहा है, पर एक बात बताइए। कितने गुजराती सेना में हैं। कितने गुजराती सीमा पर छाती ताने खड़े रहते हैं। आप व्यापार में कुशल हैं। आप बिजनेसमैन है। हम जवान हैं।

हम सीमा पर लड़ते हैं, तभी आप गुजरात में पैसा गिनते हैं। बिजनेस करना हमें नहीं आता, तो आपको भी लड़ना नहीं आता। देश वही मजबूत होता है, जहां व्यापारी भी हो और सिपाही भी।

गजनी याद है

गुजराती भाइयों, गजनी याद है। 1024 ईस्वी में गजनी आया था। मात्र 5000 लुटेरों के साथ। इन पांच हजार लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर में मौजूद 25 हजार लोगों का कत्ल कर दिया था। सोमनाथ की अकूत संपत्ति लूट ली थी और प्राणों से प्यारे भोलेनाथ महादेव के शिवलिंग को खंड-खंड कर दिया था। सैकड़ों महिलाओं को अपने साथ बंदी बना कर ले गया था। तब आप अलग थे और हम अलग, वरना हम एक होते, तो 5000 लुटेरों की छोड़िए, पांच लाख लुटेरे भी सोमनाथ को हाथ न लगा पाते।

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कुंवर सिंह को जानिए

बिहार के युवकों की तो छोड़िए, यहां के बूढ़ों में 80 साल में जवानी चढ़ती है। बिहार के भोजपुर जिले के वीर कुंवर सिंह के बारे में अंग्रेज कांपते हुए कहते थे कि 80 साल की उम्र में कोई ऐसे तलवार कैसे चला सकता है। आज भी बिहार के हर गांव का कोई न कोई बेटा सीमा पर अपनी छाती ताने रहता है। हम देश पर बोझ नहीं है और आप वरदान नहीं हैं। हम हैं, तो आप हैं, और आप हैं, तो हम हैं। आप न होंगे, तो कारोबार न होगा। देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। हम न होंगे, तो गजनी फिर आएगा और सिर्फ पांच हजार लुटेरे सोमनाथ पहुंच जाएंगे। पांच हजार लुटेरे मिलकर 25 हजार भक्तों को काट डालेंगे।

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‘गजनी’ मरा नहीं है

‘गजनी’ (आतंकी) मरा नहीं है, वह अब भी रोज भारत में घुसने की कोशिश करता है, ताकि अहमदाबाद, सूरत और गांधीनगर में जाकर तबाही मचा सके, पर हम उसे अपनी जान पर खेलकर सीमा पर ही मार गिराते हैं। हां, हम ही मार गिराते हैं। आंकड़े उठाकर देख लीजिए कि कितने गुजराती फौज में हैं। मेरे एक दोस्त ने मुझे फोन कर बताया कि उसे गुजरात में पीटा गया। वह वहां काम करता था, उसे गालियां दी गईं। यूपी-बिहार-एमपी-राजस्थान को बीमार कहा गया। बोझ कहा गया।

हम बोझ ढोते हैं, पर बोझ नहीं हैं

सुन लीजिए, हम बोझ ढोते हैं, पर बोझ नहीं हैं। हम सीमा पर अपना खून बहाते हैं और मेरा दोस्त वहां गुजरात में आपकी फैक्ट्रियों में पसीना बहाता था। खून-पसीना बहाने वाले बोझ नहीं होते। जिस हैवान ने किसी बच्ची के साथ हैवानियत की, उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उसके लिए फांसी से कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं, पर गुजराती भाई, यूपी-बिहार-एमपी-राजस्थान के लोगों को गुजरात में जो पीटा जा रहा है। अपमानित किया जा रहा है। उससे देश में क्षेत्रवाद बढ़ेगा।

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‘गजनी’ यही चाहता है

एक राज्य के प्रति दूसरे राज्य के लोगों में नफरत बढ़ेगी और सीमा पार बैठा गजनी (हमारा दुश्मन पाकिस्तान-चीन) यही चाहता है। हमारे गांव के लड़के जो आर्मी में नहीं भी हैं, वे हाथ से मारकर ईंट तोड़ देते हैं। 80 किलो का बोरा उठाकर यूं ही फेंक देते हैं जैसे तकिया हो। उनकी इस योग्यता की भी देश को उतनी ही जरूरत है जितनी आपके व्यापारी दिमाग की।

हम हारे थे, क्योंकि हम बंटे हुए थे, फिर वह मत कीजिए

मोटा भाइयों (बड़े भाइयों) हम पहले भी इसीलिए गुलाम हुए थे क्योंकि आपस में बंटे थे, फिर देश को उस रास्ते पर न ले जाइए। देश को जोड़िए, तोड़िए नहीं। देश एक परिवार है। याद रखिए, परिवार में फूट पड़ी, तो कुछ नहीं बचेगा। जहां अशांति है। जहां नफरत है। जहां हिंसा है, वहां कुछ भी हो सकता है, व्यापार नहीं बढ़ सकता। समृद्धि नही हो सकती। मोटा भाइयों, जोर से बोलिए, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम। वंदे मातरम।

आपका फौजी भाई

अवधेश

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