शिवाजी ने दलितों को पकड़ाई थी तलवार, प्रपौत्र शाहूजी महाराज ने दिया आरक्षण - धर्म संसद
sahuji maharaj the creator of reservation
Image Courtesy: dalitdastak.com

शिवाजी ने दलितों को पकड़ाई थी तलवार, प्रपौत्र शाहूजी महाराज ने दिया आरक्षण

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शाहूजी महाराज ने 1902 में अपने राज्य कोल्हापुर में दलितों और पिछड़ों को नौकरी और शिक्षा में 50 फीसदी आरक्षण दिया था। आज से 116 साल पहले। भारत में आरक्षण के जनक बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर नहीं थे, बल्कि शाहूजी महाराज थे। शाहूजी महाराज की ओर से दी गई आर्थिक मदद से ही आंबेडकर पढ़ने के लिए दोबारा विदेश जा पाए थे और अपनी अधूरी शिक्षा को पूरा किया था।

शिवाजी ने अछूत मानी जाने वाली जातियो को सेना में शामिल किया था

 शाहूजी महाराज छत्रपति शिवाजी महाराज के पौत्र आपासाहब घाटगे कागलकर के पुत्र थे। वीर छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ महान वीर नहीं थे। वे युद्ध के सबसे बड़े रणनीतिकारों में एक थे। वे समझते थे कि जब तक समाज एकजुट नहीं होगा। जब तक समाज का एक हिस्सा तलवार उठाने से वंचित रहेगा, तब तक भारत के मान को रौंद रहे विदेशियों को हराया नहीं जा सकता। 17वीं शताब्दी में वीर शिवाजी महाराज ने अछूत मानी जाने वाली जातियों को अपनी सेना में शामिल किया था। दलितों को तलवार पकड़ाई थी और औरंगजेब की विशाल सेना को उनकी छोटी सी सेना ने नाकों चने चबवा दिए थे। उनके प्रपौत्र कोल्हापुर के राजा शाहूजी महाराज ने दलितों के लिए जितना किया, उतना शायद ही किसी राजा ने किया होगा।

दलित की दुकान में चाय पीते थे शाहूजी महाराज

शाहूजी महाराज के जैसा क्रांतिकारी राजा शायद ही भारत में कोई दूसरा हुआ हो। आज से 100 साल पहले शाहूजी महाराज कोल्हापुर के भाऊसिंहजी रोड पर गंगाराम की दुकान में चाय पीते थे। इसमें बड़ी बात क्या है। बड़ी बात यह है कि चाय की दुकान चलाने वाले गंगाराम दलित थे और कोल्हापुर के राजा साहूजी महाराज ने ही गंगाराम को चाय की दुकान खोलने के लिए पैसे दिए थे। यह तब की बात है जब दलित के हाथ की चाय पीना आसमान टूटकर गिरने जैसे हुआ करता था। जब पहली बार साहूजी महाराज गंगाराम की चाय की दुकान पर चाय पीने पहुंचे थे, तो वहां उन्हें देखने के लिए भारी भीड़ जमा हो गई थी।

साहूजी महाराज ने खुद तो दलित की चाय की दुकान पर चाय पी ही। अपने मंत्रियों को भी चाय पिलाई। अब राजा को कौन मना करता। साहूजी महाराज बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के घर जाया करते थे और उनकी पत्नी रमाबाई से जिद करके चाय बनवा कर पीते थे।

अछूतों को दिलाया अस्पताल में इलाज का अधिकार

1919 से पहले अछूत कहलाने वाली जातियों के लोगों को यह अधिकार नहीं था कि वे अस्पताल में जाकर अपना इलाज करा सके। शाहूजी महाराज ने इस अन्यायपूर्ण परंपरा को खत्म कर दिया। उन्होंने अपने राज्य कोल्हापुर में यह कानून बना दिया कि कोई किसी को जाति के आधार पर अस्पताल में इलाज कराने से नहीं रोक सकता। शाहूजी महाराज ने यह भी कानून बनाया कि उनके राज्य में काम कर रहे दलित कर्मचारियों के साथ सम्मान का व्यवहार किया जाए। उन्होंने यह भी कानून बनाया कि स्कूल-कॉलेज में जाति के आधार पर कोई भेदभाव न किया जाए।

जिन्हें मंजूर नहीं, वे छह माह में त्यागपत्र दे दें

शाहूजी महाराज के इन क्रांतिकारी कदमों का जमकर विरोध शुरू हुआ। शाहूजी महाराज को कई तरह के विरोधों का सामना करना पड़ा। उन पर दबाव डाला गया कि वे इन फैसलों को वापस ले लें, पर शाहूजी महाराज ने एक और आदेश जारी कर दिया। इस आदेश में लिखा था कि जो दलित कर्मचारियों के साथ समानता का व्यवहार नहीं कर सकता। जो इन नियमों को नहीं मान सकता। वह छह माह के भीतर अपना त्यागपत्र दे दे।

भूमि सुधार लागू किया और दलितों को भू स्वामी बनाया

शाहूजी महाराज सिर्फ भाषणों में दलितों की बात नहीं करते थे, वे तो वीर शिवाजी, वीर मराठा के प्रपौत्र थे, जो कहते थे, वे कर दिखाते थे। शाहूजी महाराज ने अपने राज्य कोल्हापुर में भूमि सुधार लागू किया और दलितों को भूमि का मालिक बनाया। 1920 में उन्होंने दलित छात्रों के लिए एक छात्रावास का शिलान्यास किया।

कैम्ब्रिज से एलएलडी की उपाधि पाने वाले पहले भारतीय

शाहूजी महाराज बेहद पढ़े-लिखे व प्रतिभाशाली थे। वे कैम्ब्रिज से एलएलडी की उपाधि पाने वाले पहले भारतीय थे। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की शाहूजी महाराज ने बहुत मदद की थी। उन्होंने आंबेडकर को दलितों का मुक्तिदाता बताया था। कानपुर में 1919 में उन्हें राजर्षि का खिताब दिया गया था, क्योंकि वे राजा और ऋषि दोनों के संगम थे।

गुलामी और हार की एकमात्र यही वजह रही

भारत में वीरों की कमी कभी नहीं रही। देश के लिए शीश कटवाने वालों की भी कमी नहीं रही, पर फिर भी भारत पहले मुगलों और फिर अंग्रेजों की पराधीनता इसलिए झेलता रहा क्योंकि हमारा समाज ऊंच-नीच, दलित-पिछड़े-अगड़े में बंटा रहा। वीर शिवाजी ने इस बात को समझा। दलितों को सेना में शामिल किया। तलवार उठाने का अधिकार दिया। उनके प्रपौत्र साहूजी महाराज ने दलितों के उत्थान के लिए उन्हें आरक्षण दिया। सम्मान दिया। इस बात को समझने की जरूरत है कि वही समाज, वही देश शक्तिशाली रहता है, जो बंटा नहीं, जुटा रहता है।

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