महिला ने पूछा, कोई रेप करे, तो क्या करें, महात्मा गांधी ने दिया यह जवाब - धर्म संसद
mahatma gandhi
Image Courtesy: postcard.news

महिला ने पूछा, कोई रेप करे, तो क्या करें, महात्मा गांधी ने दिया यह जवाब

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एक मार्च, 1942 को गुजराती हरिजनबंधु पत्रिका में महात्मा गांधी ने एक महिला के पत्र के जवाब में एक लंबा लेख लिखा। इस लेख का शीर्षक था ‘बलात्कार के समय क्या करें’। दरअसल एक महिला ने महात्मा गांधी को पत्र लिखकर रेप के बारे में कुछ सवाल पूछे थे। बापू ने इन सवालों के जवाब में जो लेख लिखा, उसमें उन्होंने कहा कि पीड़िता पर जब ऐसा हमला हो, तो उसे उस समय हिंसा और अहिंसा का विचार नहीं करना चाहिए। आत्मरक्षा ही वैसी स्थिति में उसका परमधर्म है।

बापू ने लिखा कि ऐसे हमले के समय पीड़िता को जो भी साधन समझ में आए, उसका इस्तेमाल कर अपने शरीर और सम्मान की रक्षा करने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ न मिले, तो ईश्वर ने उसे नाखून दिए हैं, दांत दिए हैं। उन्हीं का इस्तेमाल करना चाहिए। जितना भी बल है, उसका इस्तेमाल करना चाहिए। बापू ने इस लेख में लिखा कि डरना नहीं चाहिए। बलात्कार के डर से पीड़िता को कभी आत्महत्या नहीं करनी चाहिए, बल्कि अंतिम सांस तक लड़ना चाहिए। संघर्ष करना चाहिए। रेप के डर से आत्महत्या कर लेने से बहुत अच्छा सम्मानजनक जीवन के लिए लड़ते-लड़ते जान दे देना है। गांधीजी लिखते हैं कि जिस महिला या पुरुष ने मौत का डर छोड़ दिया है, वे खुद की भी रक्षा कर सकते हैं और दूसरे की भी रक्षा कर सकते हैं।

रेप पीड़िता का शीलभंग नहीं होता, वह बस घायल होती है

महात्मा गांधी इस लेख में लिखते हैं कि अगर किसी महिला के साथ बलात्कार होता है, तो किसी भी तरह से उस महिला का तिरस्कार करना गलत है। वह महिला तिरस्कार या बहिष्कार की पात्र नहीं है। शीलभंग तो उस स्त्री का होता है, जो इसके लिए सहमत हो जाती है। जिसने संघर्ष किया, वह तो बस घायल हुई है और हम जैसे दूसरे घायलों की सेवा करते हैं, हमें बलात्कार पीड़िता की भी सेवा करनी चाहिए। महात्मा गांधी ने यह भी लिखा कि जिस पीड़िता के साथ बलात्कार हुआ है, उसे किसी भी तरह से निंदनीय नहीं माना जाए। बापू ने लिखा है कि अगर ऐसा होगा, तो ऐसी घटनाओं को छिपाने का जो चलन है, वह भी अपने आप समाप्त हो जाएगा। ऐसी घटनाओं के खिलाफ लोग सामने आएंगे और विरोध करेंगे।

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महिलाओं को पति के लिए भी श्रृंगार करने से इनकार कर देना चाहिए, बोले बापू

21 जुलाई 1921 और 15 सितंबर 1921 को यंग इंडिया पत्रिका में अपने लेख में महात्मा गांधी ने लिखा कि पुरुष जिन बुराइयों के लिए बदनाम है, उसमें सबसे घटिया बुराई महिलाओं का दुरुपयोग है। इस लेख में बापू ने महिलाओं को भी जगाने की कोशिश की, बापू ने लिखा कि महिलाओं खुद को पुरुष की भोग की वस्तु समझना बंद कर दो। महिलाओं को किसी भी पुरुष (इसमें पति भी शामिल है) के लिए श्रृंगार करने से इनकार कर देना चाहिए। तभी महिलाएं पुरुषों के साथ बराबरी की साथी बनेंगी।

बोले बापू, मैं अगर महिला होता, तो पुरुषों के लिए कभी नहीं सजता

बापू लिखते हैं कि किसी भी महिला को किसी भी पुरुष (इसमें पति भी शामिल है) को खुश करने के लिए सजना-संवरना नहीं चाहिए। किसी भी पुरुष को रिझाने के लिए खुद को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। बापू ने आह्वान करते हुए लिखा कि महिलाएं श्रृंगार करना छोड़ दो। परफ्यूम लगाना भी छोड़ दो। तुम्हारे दिल से जो सुगंध आती है, वही सुगंध असली है। इससे एक पुरुष नहीं, पूरी मानवता मोहित हो सकती है। बापू लिखते हैं कि अगर मेरा जन्म एक महिला के रूप में हुआ होता, तो मैं पुरुषों की इस सोच के खिलाफ बगावत कर देता कि महिलाएं पुरुषों का मन बहलाने का साधन हैं।

स्त्रियों को भी इसकी आदत पड़ गई है, यह सब अच्छा लगने लगा है, राष्ट्रपिता ने लिखा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 25 जनवरी 1936 को अपनी पत्रिका हरिजन में लिखा कि महिलाओं को पुरुषों ने अपना गुलाम समझ लिया है। उन्होंने महिलाओं को भी फटकार लगाई और लिखा कि उन्हें भी इस गुलामी की आदत लग गई है। उन्हें भी यह सब सहज और अच्छा लगने लगा है। बापू ने लिखा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि नीचे गिरने वाला आदमी अपने दूसरे साथी को भी नीचे खींच लेता है।

महिलाओं को लेकर महात्मा गांधी के विचार अपने समय से कितने आगे थे। इसका अंदाजा उनके इन लेखों को पढ़कर होता है। उनके विचार अपने समय से दशकों आगे थे। भारत को इतने महान विचारों से भरने वाले बापू को शत शत प्रणाम।

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