कैसे बना जा सकता है धनी, यक्ष ने युद्धिष्ठिर से पूछा, जानें, क्या मिला जवाब - धर्म संसद
how to become rich
Image Courtesy: khabarindiatv.com

कैसे बना जा सकता है धनी, यक्ष ने युद्धिष्ठिर से पूछा, जानें, क्या मिला जवाब

Spread the love
  • 263
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    263
    Shares

यक्ष ने कहा कि हे युद्धिष्ठिर, तुम्हारे चारों भाइयों ने बल से मुझे हराने की कोशिश की। देखो, तुम्हारे चारों भाई जमीन पर मृत पड़े हैं। महाबली भीम, महावीर अर्जुन, नकुल, सहदेव सब के सब। इनलोगों से मैंने कहा था कि तुम मेरे प्रश्नों का उत्तर दो, इसके बाद सरोवर का पानी पी लो, पर इनलोगों ने मेरी बात नहीं मानी और बिना मेरी अनुमति के सरोवर का पानी पीने का प्रयत्न किया। क्या तुम भी अपने भाइयों की तरह शक्ति के अहंकार में हो, या तुम में ज्ञान है कि तुम मेरे प्रश्नों का उत्तर देकर इस सरोवर का पानी पी सकते हो।

अपने भाइयों को इस हाल में देख युद्धिष्ठिर का मन व्याकुल हो चुका था, पर उन्होंने अपने व्यथित मन को काबू में करते हुए पूछा कि मुझे अब सरोवर का जल पीने की कोई इच्छा नहीं। अगर आप मेरे भाइयों को फिर से लौटाने का वचन दे, तो मैं आपके सारे प्रश्नों का जवाब देने को तैयार हूं। यक्ष ने कहा कि पहले तुम मेरे प्रश्नों का उत्तर तो दो। मेरे प्रश्नों का उत्तर देना इतना आसान नहीं है।

कोई मनुष्य कैसे बन सकता है धनी?

इसके बाद यक्ष ने युद्धिष्ठिर से कई प्रश्न किए। इन प्रश्नों में एक सबसे मुश्किल और रोचक प्रश्न यह था कि कोई मनुष्य धनी कैसे बन सकता है? यक्ष ने युद्धिष्ठिर से पूछा कि हे युद्धिष्ठिर, तुम्हें धरती के सबसे ज्ञानी लोगों में एक माना जाता है। कहा जाता है कि तुम धर्म के बड़े ज्ञाता हो, पर क्या तुम बता सकते हो कि कोई मनुष्य धनी कैसे बन सकता है?

युद्धिष्ठिर ने बताया, कैसे बना जा सकता है धनी

यक्ष की बात सुनकर यद्धिष्ठिर ने सहमति में सिर हिलाया और कहना शुरू किया कि हे यक्षराज, लालच का त्याग कर ही कोई मनुष्य धनी बन सकता है। बिना लालच त्यागे कोई धन नहीं कमा सकता। धनी नहीं बन सकता। युद्धिष्ठिर का यह उत्तर सुन यक्ष बड़े प्रसन्न हुए।

क्या सचमुच आज भी ऐसा है, इसे अच्छे से समझिए

युद्धिष्ठिर कहते हैं कि लालच का त्याग कर ही मनुष्य धनी बन सकता है। कैसे। जैसे मान लीजिए कि दो व्यापारी हैं। दोनों व्यापार कर रहे हैं। एक व्यापारी लालची है और दूसरा ईमानदार। एक व्यापारी अपने ग्राहकों को ठगता है। अपने कर्मचारियों का वेतन का पैसा भी जब मौका मिलता है, मार लेता है। उसके पास पैसे बढ़ते ही जा रहे हैं। लालच कर वह लगातार अमीर होता जा रहा है।

दूसरा व्यापारी ईमानदार है। वह भी मुनाफा कमाने के लिए दिनरात मेहनत करता है, पर ग्राहकों को संतुष्ट कर उनसे पैसे लेने की कोशिश करता है। ग्राहकों को ठगने का प्रयास नहीं करता। अपने कर्मचारियों को खूब मेहनत करने के लिए समझाता है। उनसे काम भी पूरा लेता है, पर उनके हक के पैसे नहीं मारता। उन्हें समय पर वेतन देता है। अपने कर्मचारियों के हक के पैसे हड़पने का लालच नहीं करता। इतना ही नहीं, अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को तो वेतन के अलावा पुरस्कार भी देता है।

कुछ वर्षों बाद क्या होता है, इसे समझिए

दूसरे व्यापारी के पास पहले वाले व्यापारी की तुलना में कम धन है, पर कुछ वर्षों बाद क्या होता है। इसे समझिए। पहले व्यापारी के ग्राहक धीरे-धीरे यह समझ जाते हैं कि व्यापारी उन्हें ठग रहा है और वे उससे सामान लेना बंद कर देते हैं। व्यापारी के ग्राहक तो उसे छोड़ ही देते हैं। उसके मेहनती कर्मचारी भी धीरे-धीरे अच्छी नौकरी ढूंढ़ कहीं और चले जाते हैं। जो वहां काम करते रहते हैं। उनका मन भी काम में नहीं लगता। वे बस किसी तरह समय काट रह होते हैं। धीरे-धीरे व्यापारी का धंधा चौपट हो जाता है। वहीं दूसरे व्यापारी के ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती चली जाती है। उसके ईमानदारी के चर्चे लोगों में होने लगते हैं।

लोगों के मन में यह बात बैठ जाती है कि यह व्यापारी किसी को नहीं ठगता। उसका व्यापार लगातार उन्नति करता जाता है। व्यापारी के सभी कर्मचारी समय पर वेतन और अच्छे काम का पुरस्कार मिलने से खुश रहते हैं। वे पूरे मन से अपना काम करते हैं और किसी दूसरे व्यापारी से ज्यादा वेतन का प्रस्ताव (ऑफर) मिलने के बाद भी नौकरी छोड़ कर नहीं जाते, क्योंकि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनका व्यापारी न केवल उन्हें समय पर पैसे और काम का पुरस्कार देता है, बल्कि उनके साथ अच्छा व्यवहार भी करता है।

कभी क्रोध नहीं करता। कड़वी बात नहीं बोलता। इसलिए वे ज्यादा पैसों के ऑफर के बाद भी कहीं और नहीं जाना चाहते। ग्राहकों की बढ़ती संख्या और कर्मचारियों के टिकने और मेहनत से काम करने की वजह से यह व्यापारी बहुत धनी हो जाता है, जबकि लालच करने के कारण पहले वाले व्यापारी को शुरुआत में तो सफलता मिलती है। धन मिलता है, पर बाद में वह बर्बाद हो जाता है। युद्धिष्ठिर की यह शिक्षा आज भी उतनी ही उपयोगी है, जितनी तब थी। बस इसे अपनाने और इस पर चलने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें: सलमान, इमरान के बाद अब शाहरुख के बेटे भी हुए गणेश भक्त, जानिए क्यों हो रहा ऐसा

यह भी पढ़ें: साधु-दारोगा दोनों ने महिला को गोद में उठाया, नियम तोड़ सबको जीना सिखाया

(Visited 194 times, 1 visits today)

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *