कटुवचन कहने वाली पत्नी बनती है जूं, इन पति का होता है डरावना हाल: गरुड़पुराण - धर्म संसद
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कटुवचन कहने वाली पत्नी बनती है जूं, इन पति का होता है डरावना हाल: गरुड़पुराण

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हिन्दू धर्म शास्त्र गरुड़ पुराण में कहा गया है कि पति-पत्नी का संबंध पवित्र प्रेम का संबंध है। पति-पत्नी से ही सृष्टि है। इस संबंध के बिना संसार और सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं। पति-पत्नी को गाड़ी के दो पहिए की तरह सूझ-बूझ से एक दिशा में चलना चाहिए और एक-दूसरे को सहयोग करना चाहिए, पर जो पति या पत्नी अपने साथी के साथ अनुचित व्यवहार करते हैं, उनके लिए गरुड़पुराण में उस सजा का भी वर्णन है, जो उन्हें भोगना ही होगा।

इस सजा से उन्हें कोई नहीं बचा सकता। अपने साथी के साथ गलत व्यवहार करने वाले पति-पत्नी अगर एकबार उस सजा के बारे में पढ़ लें, तो हो सकता है कि उनका हृदय परिवर्तन हो जाए। अगर उन्हें पता चल जाएं कि उन्हें इस जन्म में, मृत्यु के बाद और अगले जन्म में भी सिर्फ इसलिए ये भयानक सजाएं भोगनी होंगी, क्योंकि उन्होंने अपने जीवनसाथी के साथ अनुचित व्यवहार किया था, तो हो सकता है कि उनकी आंख खुल जाए और वे अपने जीवनसाथी को सम्मान देना शुरू कर दें।

पत्नी दोषी है, तो क्या सजा मिलेगी

जो बहू सास-ससुर का अपमान करती है। उन्हें गाली देती है, गरुड़पुराण के मुताबिक उसका अगला जन्म जोंक के रूप में होता है। जो पत्नी घर में रोज किसी न किसी बात को लेकर कलह करती रहती है। बहाने ढूंढ़-ढूंढ़ कर पति से झगड़ा करती है। हर समय पति का अपमान करती रहती है और कड़वे वचन कहती रहती है। गरुड़पुराण के मुताबिक ऐसी पत्नी अगले जन्म में जूं (ढील) बनती है।

जो पत्नी अपने पति के साथ विश्वासघात करती है और दूसरे पुरुषों से संबंध बनाती है। व्याभिचार करती है। वैसी पत्नी जिसका चरित्र खराब हो गया है, वह अगले जन्म में चमगीदड़ी, छिपकली या दो मुंह वाली सर्पिणी बनती है। दूसरे पुरुष के मोह में पड़कर व्याभिचार करने वाली और अपने पति को धोखा देने वाली स्त्री को इस जन्म में और अगले जन्म में तो दुख भोगने ही पड़ते हैं। साथ ही मृत्यु के बाद शाल्मली वृक्ष के नीचे उसे इतना कष्ट भोगना पड़ता है कि उसे सुनकर भी कलेजा कांप जाएगा।

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पति दोषी है, तो क्या सजा मिलेगी

गरुड़पुराण कहता है कि जो पति अपनी पत्नी को भोजन कराए बिना भोजन करता है, वह नरक में असहनीय दुख भोगता है। जो पति अपनी पत्नी से जबरन उसकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का ध्यान रखे बिना संबंध बनाता है, उसे नरक में असहनीय दुख भोगने पड़ते हैं। जो पुरुष किसी के विवाह में बाधा डालता है, उसे नरक में वर्षों दुख भोगने से कोई नहीं बचा सकता। जो पति अपनी पतिव्रता पत्नी पर लांछन लगाता है, उसे मृत्यु के बाद वैतरणी नदी में ऐसे-ऐसे दुख भोगने पड़ते हैं कि सुनकर ही कोई भी सिहर उठेगा। जो विवाहित पुरुष किसी दूसरे की पत्नी को उठा लाता है या किसी कुमारी लड़की के साथ संबंध बनाने की इच्छा रखता है, इन्हें यमदूत वैतरणी नदी में डालकर छोड़ देते हैं, जहां एक-एक पल काटना इतना कष्टदायक है कि उसकी कल्पना भी मुश्किल है।

जो महिलाओं को मारता-पीटता है और पत्नी का गर्भपात करा देता है, उसे इस जन्म में, अगले जन्म में और जन्म से पहले नरक में यमदूत अकल्पनीय सजा देते हैं। जो महिलाओं को किसी तरह बहला-फुसला कर उनका धन ठग लेता है, जो अपनी पतिव्रता स्त्री का त्याग कर देता है, जो वेश्याओं के चक्कर में पड़ जाता है, ऐसे सभी पापी वैतरणी नदी में गिरकर सजा भोगते हैं और अगले जन्म में गिद्ध आदि पक्षी बनते हैं। इन्हें 21 नरकों से होकर गुजरना पड़ता है। गरुड़पुराण के अनुसार कन्या की हत्या करने वाला कोढ़ी हो जाता है और उसे अगले जन्म में भी इसका फल भोगना पड़ता है।

जो किसी के विवाह में विघ्न डालता है, उसका होठ कट जाता है। जो ऊपर से ब्राह्मण दिखे, पर अंदर से दुष्ट हो, वह अगले जन्म में बगुला बनता है। जो अपनी बहन से जलता है, वह बार-बार गर्भ में तो आता है, पर जन्म नहीं लेता, बार-बार गर्भ में ही उसकी मौत होती रहती है। अगर कोई पुरुष किसी स्त्री से प्रेम का वचन देकर संबंध बनाता है, और विवाह नहीं करता, तो उससे जो पुत्र पैदा होता है, वह उस पुरुष को नरक में जाने का कारण बनता है।

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