रेपिस्ट नहीं होते बिहारी, देखिए NCRB के आंकड़े, वीरों की धरती को कौन कर रहा बदनाम - धर्म संसद
biharis are not rapists
Image Courtesy: patnadaily.com

रेपिस्ट नहीं होते बिहारी, देखिए NCRB के आंकड़े, वीरों की धरती को कौन कर रहा बदनाम

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biharis are not rapists
मुक्तिनाथ कुमार शांडिल्य

गुजरात में बिहारियों पर हमले हो रहे हैं। बिहार के गया के एक युवक को गुजरात में रॉड से पीटपीट कर मार दिया गया। महाराष्ट्र की जीरो पार्टी जिसके महाराष्ट्र विधानसभा में जीरो विधायक हैं और लोकसभा चुनाव में जिसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी, राज ठाकरे की वह पार्टी मनसे वहां बिहारियों को बदनाम कर रही है। गुजरात में राजनीति की चक्की में निर्दोष बिहारी मजदूर पीस रहे हैं, जबकि गुजरात के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और आईपीएस अधिकारी बिहार से हैं।

गुजरात के चीफ सेक्रेटरी जेएन सिंह और गुजरात के डीजीपी शिवानंद झा दोनों बिहारी हैं। अगर बिहारी इतने ही अयोग्य होते हैं, तो क्यों गुजरात के शासन की पूरी बागडोर बिहार के अधिकारियों के हाथ में है। गुजरात के 167 आईपीएस अधिकारियों में 18 बिहारी हैं। बिहारी रेपिस्ट नहीं होते साहब।रेपिस्ट होते, तो हर साल इतने आईएएसआईपीएस बिहार से नहीं निकलते। बिहारी रेपिस्ट नहीं होते साहब, कुछ एक लोगों की काली करतूत की सजा पूरे बिहार के माथे पर रेपिस्ट होने का कलंक लगा कर न दीजिए। यह तो वीर कुंवर सिंह की धरती है। यह चंद्रगुप्त मौर्य की धरती है। अशोक की धरती है। बुद्ध की धरती है। माता सीता की धरती है।

यह तो उन सात युवाओं की धरती है

यह तो वीरों की धरती है। उन सात युवाओं की धरती है, जिन्होंने सीने में गोलियां उतर जाने के बाद भी तिरंगा फहरा कर दम लिया था। सात युवा, गोलियों से छलनी शरीर, पर आगे बढ़ते रहे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 11अगस्त 1942 में सचिवालय भवन पर तिरंगा फहराने के लिए बिहार के इन सातों युवाओं ने शहादत दे दी थी। बिहार उन सात युवाओं की धरती है साहब। यह राजेंद्र बाबू और जगजीवन बाबू की धरती है।

यह रामधारी सिंह दिनकर की धरती है। बिहार के जिन हैवानों ने बच्चियों के साथ हैवानियत की, उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्हें फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए, पर बिहार जैसे वीरों की धरती पर ऐसे कलंक न लगाओ। देश का कोई ऐसा राज्य नहीं, जहां बिहार के आईएएस-आईपीएस नहीं। हम मजदूर भी हैं। सिपाही भी हैं।अफसर भी हैं। कलाकार भी हैं। लेखक भी हैं। रचनाकार भी हैं, पर हम रेपिस्ट नहीं है साहब।

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बिहार की संस्कृति में महिलाओं का सम्मान

बिहार का इतिहास देख लो। यहां की संस्कृति में महिलाओं का सम्मान करना है। यहां की संस्कृति में महिलाओं का आदर करना है। एनसीआरबी के आंकड़े देखिए, इन आंकड़ों के मुताबकि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में बिहार 11वें स्थान पर हैं। हैवान कहां नहीं होते। किस धरती में ऐसे कुछ कपूत पैदा नहीं हो जाते, पर अगर यूं एक-दूसरे के प्रति नफरत बढ़ेगी। एक राज्य में दूसरे राज्य के लोगों पर हमले होंगे, तो फिर देश का क्या होगा। देश की एकता का क्या होगा।

बेटियों को गर्भ में मारना बिहार की संस्कृति नहीं, आंकड़े देखिए बिहार में बेटियों को गर्भ में मारने की संस्कृति नहीं है। हम बेटियों को बोझ नहीं समझते साहब। हमारे यहां बेटियां मां दुर्गा, शक्ति, सरस्वती, लक्ष्मी का रूप होती हैं। आंकड़ें देख लीजिए। बिहार का लिंगानुपात (सेक्स रेसियो) देश के लिंगानुपात से बहुत बेहतर है। बिहार का चाइल्ड सेक्स रेसियो 933 है जबकि देश का 914 है। इसका मतलब यह है कि बिहार में 1000 लड़कों पर 933 लड़कियां हैं जबकि देश में 1000 लड़कों पर 914 लड़कियां हैं। जबकि कई राज्यों में हालत यह है कि 1000 लड़कों पर 834 लड़कियां हैं।

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बिहार में ऑनर किलिंग के नाम पर नहीं मारी जाती बेटियां

बिहार में ऑनर किलिंग के नाम पर बेटियों को मारना यहां की संस्कृति और परंपराओं को हिस्सा कभी नहीं रहा है। बिहार लक्ष्मी का उपासक नहीं रहा है। यहां तो सरस्वती की उपासना होती है। सरस्वती पूजा पर देख लीजिए। कोई गली-चौराहा ऐसा नहीं मिलेगा, जहां मां सरस्वती की आराधना नहीं हो रही होगी। जिन युवाओं का पढ़ाई-लिखाई में मन नहीं लगता, वे भी मां सरस्वती की आराधना करते हैं, क्योंकि यहां मां सरस्वती की पूजा की संस्कृति है, पर लक्ष्मी पूजा पर यह उल्लास देखने को नहीं मिलता। यहां लक्ष्मी पूजा इतनी धूमधाम से नहीं होती।

हर राज्य की अपनी खूबियां, अपनी चुनौतियां होती हैं। बिहार के सामने भी चुनौतियां हैं। बिहार को उन चुनौतियों से आगे निकलने की कोशिश करनी है। कभी मगध देश की राजधानी हुआ करती थी। पूरे देश का शासन यहां से चलता था। बिहारियों, उठो, जागो, फिर से वह गौरव हासिल करो, ताकि तुमसे पूछा जाए, अरे आप बिहार से हैं। उस भूमि को प्रणाम।

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